|
धनतौली - जहाँ स्वर्ग और धरती मिलते हैं |
|
भ्रमण
|
|
शुक्रवार , , 16 नवम्बर |
|
प्रिति टेलर
श्रीमति प्रिति टेलर वडोदरा शहर में रहती हैं. प्रिति तरकश के लिए भ्रमण वृतांत लिखती हैं.
|
भारत विविधताओं का देश है. यहाँ प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की भरमार है. मुझे हमेशा से घूमने का शौक रहा है. मैंने भ्रमण के दौरान भारत के कई पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया है. इन्ही पर्यटन स्थलों में से कुछ स्थलों का विवरण अपने शब्दों में देना चाहूँगी.
4. धनतौली और केम्पटी फॉल -
मन बहुत चंचल होता है ...जाना था जापान पहुँच गए चीन समझ गए ना ...!!!! देहरादून पहुँच कर हम ऋषीकेश, मुनी की रेती और देवप्रयाग तक घूम कर फिर वापस आ गए है अपने अगले पड़ाव पर जाने के लिए ...देहरादून के पहाड़ों की ओर जाने वाली बसों के अड्डे से हमने मसूरी जाने के लिए बस ली. देहरादून से विदा लेकर बस मे बैठे और हरी भरी वादियों में बहती हुई ठंडी हवाओं को महसूस करने लगे जो हमारे कानों में जैसे कुछ कहने लगती है . प्रकृति के गीत गाने लगती है . जिग जैग सड़क पर गुजर रही बस की खिड़की के बाहर का नज़ारा हरदम बदलता है... कभी दिल को जोरों से धड़का देने वाली खाई की गहराई नजर आती है तो कभी बादलों को चूमते हुए पहाड़ों की ऊँचाई ... मैदान का दामन छोड़ कर कब हम पहाड़ों की आगोश में आ जाते है कुछ पता ही नहीं चलता . अगर आप निजी वाहन से जा रहे हो तो रस्ते में एक बड़ा सा सुंदर मन्दिर पड़ता है जहाँ आप थोड़ी देर रुक कर वादियों से मन ही मन में कुछ संदेश दे सकते हैं ....
धीरे धीरे छोटी छोटी बस्तियों को पार करते हुए हमारी बस मसूरी पहुँच ही गई . ये वृतांत मेरे २००१ के दौरे का है . मेरी कम्पनी में से आवंटित होली डे होम में हम रुके . हमारा कमरा होटल के सबसे ऊपर वाली मंज़िल पर था . खिड़की से पर्दा हटाते ही बाहर दूर देहरादून वेली नजर आई . रात में जब पूरे देहरादून की बत्तियां रोशन हो चुकी तो ये नजर कुछ ऐसा लग रहा था की चाँद पुरी सितारों की बारात लेकर ज़मीन पर आ गया हो . यादें कितनी सुहानी हुआ करती है ना ?
हम सुबह सुबह पहुँच चुके थे . फ्रेश हो कर नीचे माल रोड की सड़क पर स्थित बाज़ार में टहलने निकल पड़े . मई का महीना होने के बावजूद यहाँ की सर्दी वडोदरा की दिसम्बर की सर्दी के बराबर थी . इस समय आइसक्रीम या सोफ्टी खाने का मजा कुछ और ही है . कैमल बेक और मॉल रोड की सड़क की खास विशेषता यह है की यहाँ एक और ही मकान है और दूसरी और सुंदर और मजबूत रैलिंगें बनी हुई है जहाँ से आप पुरी वेली का नज़ारा ले सकते हो . एक खास अंतर पर बैठ के देखने के लिए भी सुचारु व्यवस्था है . हर जगह से दृश्य लगातार बदलते नज़र आयेंगे ...
कभी साफ सुथरी दिखती पहाड़ की वादी पल भर में ही जैसे बादलों की चुनर से अपना चेहरा छुपा लेती है . अभी तेज चमकती धुप होती है तो दोपहर बाद ज़ोरदार बारिश भी हो सकती है . पहाड़ों के वातावरण की ये तासीर आप सभी जगह पर महसूस कर सकते हो ...हो सके तो बड़ी सुबह ही घूमने निकल जाओ और दोपहर तक वापस भी आ जाओ .
दूसरे दिन हम साइकिल रिक्शा में बैठ कर मुनिसिपल गार्डन गए . तकरीबन दो तीन किलो मीटर की दूरी पर यह सुंदर उद्यान है . जिसमे एक ग्लास हाऊस है . सुंदर पेड़ पौधे लगे है . बोटिंग की भी सुविधा मौजूद है . लेकिन सबसे रुचिकर तो यहाँ तक पहुँचने का रास्ता ही है . बस्ती पीछे छूट जाती है . इक्के दुक्के प्राइवेट बंगलो ही दिखाई देते है . होती है सिर्फ़ हरी भरी वादी और उसकी बोलती हुई खामोशी ...मकानों की बनावट गौर करने लायक है . पहाड़ों की ढलान पर ऊपर से नीचे तक बने मकान बहुत सुंदर लगते है .
यहाँ पर मुख्य राज्य परिवहन के बस अड्डे से दो छोटे प्रवास की सुविधा है . एक कम्प्टी फाल के लिए है . दिन में दो बार जा सकते है . एक बस सुबह आठ बजे जाती है जो दोपहर तक वापस ले आती है . दूसरी दोपहर में चलती है जो शाम को वापस ले आती है . हम सुबह में ही चल दिए . मसूरी से तकरीबन १५ किलोमीटर की दूरी पर और समुद्र की सतह से ४५०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह जल प्रपात है .मसूरी तक आता हुआ नज़ारा यहाँ कुछ अपनी तासीर बदल लेता है . पहाड़ की चोटी से छलांग लगाकर एक झरना सीधे नीचे गिर रहा है ...यही है कम्प्टी फाल . काफी नीचे तक चल कर जाना पड़ता है .अच्छी खासी पैरों की कसरत हो जाती है .
नीचे एक बड़ा सा तालाब बन जाता है और नीचे जाकर फिर वह यमुना नदी में विलीन हो जाता है . नहाने के शौकीन लोग यहाँ ये शौक भी फरमाते है . किराये पर स्वीमिंग के कपडे मिल जाते है ..अब वापस ऊपर चढ़ते हुए समझ आता है कि हम कितना नीचे गए थे क्योंकि अब साँसे फूलने लगती है ...बेक टू पवेलियन मसूरी ...शाम को माल रोड के केबल कार में बैठ कर मसूरी कि सबसे ऊँची जगह गन हिल पहुंचे ...चारों दिशाओं से मसूरी का विहंगावलोकन किया . ये हँसी वादियाँ ये खुला आसमान ...आ गए हम कहाँ ?....
दूसरी सुबह उसी परिवहन कि बस से हम जा रहे है एक कम लोकप्रिय पर अलौकिक सौंदर्य कि मिसाल धनौलती. मसूरी से २५ किलोमीटर पर स्थित इस जगह से हमें हिमालय का सही मायने में परिचय होता है . सब कुछ मानों कि विशाल हुआ चला जाता है चाहे वो पहाड़ हो या गहरी खाई या पेड़ .... हर मोड़ पर धड़कनें तेज होने लगती है . यहाँ मौसम की सबसे पहली बर्फ पड़ती है . सेब के बागान है .बिल्कुल शांत फिर भी रमणीय ,बिल्कुल भीड़ भाड़ नहीं ...नितांत सौंदर्य की बौछार ..निजी वाहन में यहाँ पर आकर दो तीन दिन रुक सकते है ...
यहाँ से १० किलोमीटर दूर एक और स्थान है . सुर खंडा देवी का मन्दिर . पहाडी पर स्थित है . तीन किलोमीटर पैदल चलकर जा सकते है . घोडे भी उपलब्ध होते है . चोटी पर पहुँच कर एक और सुंदर नज़ारा देखिये . हम गए तो बादल हमें छू कर जा रहे थे. बादल की बूंदों की ठंडक हमारे गालों को सहला कर भाग रही थी ..लेकिन जब नीचे पहुंचे तो वातावरण एकदम साफ ....
वापसी में जोरों की बारिश हो रही थी .धीरे धीरे चलती हुई हमारी बस मसूरी की तरफ़ बढ़ रही थी . प्रकृति का यह अनुपम सौंदर्य आँखों में समाकर हम पहुंचे मसूरी झील ..एक मनोरम स्थान . बोटिंग की सुविधा है . सुंदर पिकनिक स्पॉट है .
यहाँ के गर्म कपड़े बड़े ही स्टाइलिश होते है . यहाँ बोर्डिंग स्कूल भी बहुत है . होटल की तो भरमार है .कैमरे में कैद करके जो ख़ूबसूरत पल में लायी थी आज फिर आपके साथ एक बार फिर सहला रही हूँ ........
हम कितने प्रदूषण युक्त वातावरण में रहते है , कितनी ज़हरीली सांसे लेते है , और प्रकृति ने हमारे लिए बनायी हुई इस दुनिया की विकास के नाम पर हमने क्या दुर्गति की है उस भूल को आप महसूस कर सकते हो धनौलती में ....कम जानी पहचानी होने के बावजूद दिल में बस गई है ....
|
|
|
|