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सहस्त्रधारा - एक आलौकिक जगह
प्रयोक्ता का मूल्यांकन: / 2
बेकारअति उत्तम 
भ्रमण
शनिवार , , 29 सितम्बर

chantu

  प्रिति टेलर


 

श्रीमति प्रिति टेलर वडोदरा शहर में रहती हैं. प्रिति तरकश के लिए भ्रमण वृतांत लिखती हैं. 

saharstadhara

 

भारत विविधताओं का देश है. यहाँ प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की भरमार है. मुझे हमेशा से घूमने का शौक रहा है. मैंने भ्रमण के दौरान भारत के कई पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया है. इन्ही पर्यटन स्थलों में से कुछ स्थलों का विवरण अपने शब्दों में देना चाहूँगी.

2. सहस्त्रधारा -

sahastradhara-0हमारा दूसरा पड़ाव है सहस्त्रधारा ....

हरिद्वार से हिमालय के चरणस्पर्श कर हम थोडा और आगे चलते है. आगे राजाजी नेशनल पार्क पडता है. इस पार्क को राष्ट्रीय अभ्यारण्य का गौरव प्राप्त है. यहाँ आप जीप में बैठकर सैर कर सकते है जो वहीं किराये पर मिलती है. वैसे हम समय के अभाव के कारण वहां जा नही पाए पर वाइल्ड लाइफ के चाहक इधर ज़रूर जाएँ.

देहरादून की ओर चलते समय रास्ते पर आती है यह सहस्त्रधारा...

सहस्त्रधारा, एक सुंदर और प्राकृतिक धारा है. एक बार तो आपको इस जगह कोई खूबी तुरंत नज़र नहीं आएगी, पर यह पुरी जगह अपने आप में एक अजूबा है. एक पहाड़ी से गिरते हुए जल को एक प्राकृतिक तरीके से ही संचित किया गया है. कहा जाता है की यह जल गंधक मिश्रित होता है जिसके उपयोग से चमड़ी के दर्द ठीक हो सकते है. पर असली अजूबा यहाँ नही है. यहाँ से थोडी दूर एक पहाड़ी पर है असली अजूबा. इस पहाड़ी के अंदर प्राकृतिक रूप से तराशी हुई कई छोटी छोटी गुफाएँ है, जो बाहर से तो स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती किंतु इन गुफा में जब प्रवेश करते है तो देखते हैं कि गुफाओं की छत से अविरत रिमझिम हल्की बारिश की बौछारें टपकती रहती है. बस यही सहस्त्रधारा है.

वहां कई लोग अपने पोलियो ग्रस्त बच्चों को गंधक के पानी में नहलाते हुए नजर आए. यह जगह छोटी सी है, जहाँ कुछ घंटे जरूर रुक सकते है. चाय पानी नाश्ते का भी सुचारु इंतज़ाम है. कुछ हस्तकला की चीजों की दूकाने भी है.

एक बात तो है कि हुनर और हस्तकला में हर राज्य की एक अपनी पहचान -विशेषता उभर कर सामने आती है.
 
यहां से तकरीबन ग्यारह किलोमीटर की दूरी पर उत्तरांचल की राजधानी देहरादून बसी हुई है. यहाँ कई महत्वपूर्ण संस्थाओं के मुख्यालय भी है. यहाँ का दून स्कूल जगविख्यात है जहाँ हमारे कई महानुभाव पढे हुए है.

हिमालय की गोद में बसा हुआ ये स्थल पर्यावरण के सुचारु रखरखाव की अच्छी मिसाल है. यह हरा भरा है, प्रदूषण से मुक्त है. यहाँ के चावल उसकी अनोखी खुशबू के कारण जगमशहूर है. यहां से मसूरी जा सकते है.

लेकिन मसूरी से पहले हम चलेंगे ऋषीकेश जो मेरी सबसे मनपसंद जगह भी है हमारी अगली मुलाक़ात में .............. 
 
 
 
 
 


 
 

 

टिप्पणियाँ (1)add
...
द्वारा प्रेषित G Vishwanath , अक्टूबर 01, 2007
बधाई !
आपका लेख यहाँ देखकर प्रसन्न हुआ ।
यूँही लिखते रहिए ।
शुभकामनाएं ।
G विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंगळुउरु

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